प्रकाश (Light): दर्पण और लेंस के सूत्र, उपयोग और One-Liners
Railway NTPC, Group D, SSC MTS, SSC GD और UP Police परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले सभी सूत्र और तथ्य — एक ही पेज पर, सरल हिंदी में।
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रकाश (Light) का topic बहुत महत्वपूर्ण है। Railway NTPC, Group D, SSC GD, SSC MTS और UP Police — इन सभी परीक्षाओं में दर्पण (Mirror) और लेंस (Lens) के सूत्र से हर साल 2 से 4 प्रश्न जरूर आते हैं। इस लेख में हमने सभी सूत्रों को सरल हिंदी में समझाया है और साथ में वो One-Liners भी दिए हैं जो exam में बार-बार repeat होते हैं। एक बार इसे पूरा पढ़ लें — फिर इस topic में कभी गलती नहीं होगी।
1. प्रकाश (Light) — मूल अवधारणाएं
प्रकाश एक प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंग (Electromagnetic Wave) है जो हमें वस्तुओं को देखने में सहायता करती है। यह सीधी रेखा में चलती है और इसे किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती — यानी यह निर्वात (Vacuum) में भी चल सकती है।
📌 प्रकाश के मुख्य गुण — Exam में Direct पूछे जाते हैं:
- परावर्तन (Reflection): प्रकाश का किसी चमकदार सतह से टकराकर वापस लौटना।
- अपवर्तन (Refraction): एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की दिशा बदलना।
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection): घना माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर critical angle से अधिक कोण पर प्रकाश वापस लौटना।
- विवर्तन (Diffraction): प्रकाश का किसी अवरोध के किनारे से मुड़ना।
- व्यतिकरण (Interference): दो प्रकाश तरंगों का आपस में मिलना।
- ध्रुवण (Polarisation): प्रकाश तरंग का एक ही दिशा में कंपन।
⚡ परावर्तन के दो नियम (Laws of Reflection) — हर exam में पूछे जाते हैं:
- नियम 1: आपतन कोण (Angle of Incidence) = परावर्तन कोण (Angle of Reflection) — अर्थात ∠i = ∠r
- नियम 2: आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब (Normal) — तीनों एक ही तल में होते हैं।
2. दर्पण (Mirror) — प्रकार, सूत्र और उपयोग
दर्पण एक चमकदार सतह होती है जो प्रकाश को परावर्तित करती है। Railway NTPC और Group D में दर्पण से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं — खासकर उपयोग (Uses) से।
दर्पण के प्रकार (Types of Mirrors)
| दर्पण का प्रकार | सतह का स्वरूप | फोकस | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| समतल दर्पण (Plane Mirror) | सपाट | आभासी | घरों में दर्पण, पेरिस्कोप |
| अवतल दर्पण (Concave Mirror) | अंदर की ओर वक्र | वास्तविक | डॉक्टर का दर्पण, हेडलाइट, सोलर कुकर, टॉर्च |
| उत्तल दर्पण (Convex Mirror) | बाहर की ओर वक्र | आभासी | वाहनों का पीछे देखने वाला दर्पण (Rear View Mirror) |
दर्पण सूत्र (Mirror Formula)
अवतल दर्पण में प्रतिबिंब की स्थिति (Object-Image Table)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का स्वभाव | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर (∞) | फोकस पर (F) | वास्तविक, उल्टा | बिंदु आकार |
| C से परे | F और C के बीच | वास्तविक, उल्टा | छोटा (Diminished) |
| C पर | C पर | वास्तविक, उल्टा | समान आकार |
| F और C के बीच | C से परे | वास्तविक, उल्टा | बड़ा (Magnified) |
| फोकस पर (F) | अनंत पर (∞) | वास्तविक, उल्टा | बहुत बड़ा |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी, सीधा | बड़ा (Magnified) |
उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब की स्थिति
- उत्तल दर्पण में हमेशा आभासी (Virtual), सीधा (Erect) और छोटा (Diminished) प्रतिबिंब बनता है — चाहे वस्तु कहीं भी हो।
- प्रतिबिंब हमेशा F और P के बीच बनता है।
- यही कारण है कि उत्तल दर्पण Rear View Mirror में use होता है — यह बड़ा area दिखाता है।
समतल दर्पण (Plane Mirror) की विशेषताएं
- प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु के समान आकार का होता है।
- प्रतिबिंब दर्पण के उतने ही पीछे होता है जितनी दूर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- दो समतल दर्पणों के बीच θ कोण पर रखने पर बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या: n = (360°/θ) − 1
- उदाहरण: 60° कोण पर → (360/60) − 1 = 5 प्रतिबिंब
- 90° कोण पर → (360/90) − 1 = 3 प्रतिबिंब
3. लेंस (Lens) — प्रकार, सूत्र और उपयोग
लेंस दो गोलीय पृष्ठों से घिरा हुआ पारदर्शी माध्यम है। SSC GD, SSC MTS और UP Police में लेंस के उपयोग और Eye-Defect correction से सबसे अधिक प्रश्न आते हैं।
लेंस के प्रकार (Types of Lenses)
| लेंस का प्रकार | आकृति | फोकस | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| उत्तल लेंस (Convex Lens) | बीच में मोटा | वास्तविक (Real) | आवर्धक लेंस, कैमरा, दूरदर्शी, दूरदृष्टि दोष सुधार |
| अवतल लेंस (Concave Lens) | बीच में पतला | आभासी (Virtual) | निकटदृष्टि दोष (Myopia) सुधार, चश्मे का लेंस |
लेंस सूत्र (Lens Formula)
नेत्र दोष और लेंस का उपयोग — Exam में जरूर आता है
| नेत्र दोष | हिंदी नाम | कारण | सुधार |
|---|---|---|---|
| Myopia (निकटदृष्टि) | निकट दृष्टि दोष | दूर की वस्तु धुंधली | अवतल लेंस (Concave) |
| Hypermetropia (दूरदृष्टि) | दूर दृष्टि दोष | पास की वस्तु धुंधली | उत्तल लेंस (Convex) |
| Presbyopia (जरादूरदृष्टि) | वृद्धावस्था दोष | पास और दूर दोनों धुंधले | Bifocal लेंस |
| Astigmatism (दृष्टिवैषम्य) | अनियमित दृष्टि | कॉर्निया अनियमित | Cylindrical लेंस |
उत्तल लेंस में प्रतिबिंब की स्थिति
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | स्वभाव | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर (∞) | फोकस पर (F₂) | वास्तविक, उल्टा | बिंदु आकार |
| 2F से परे | F₂ और 2F₂ के बीच | वास्तविक, उल्टा | छोटा |
| 2F पर | 2F₂ पर | वास्तविक, उल्टा | समान आकार |
| F और 2F के बीच | 2F₂ से परे | वास्तविक, उल्टा | बड़ा |
| फोकस पर (F₁) | अनंत पर (∞) | वास्तविक, उल्टा | बहुत बड़ा |
| F के भीतर (O और F के बीच) | उसी तरफ (आभासी) | आभासी, सीधा | बड़ा (Magnified) |
4. Sign Convention — परीक्षा में सबसे जरूरी
New Cartesian Sign Convention को समझे बिना formula apply करना मुश्किल है। Railway NTPC और SSC GD में इसी से गलतियाँ होती हैं।
📐 New Cartesian Sign Convention के नियम:
- सभी दूरियाँ ध्रुव (Pole) से मापी जाती हैं।
- मुख्य अक्ष (Principal Axis) के समांतर आपतित किरण की दिशा में दूरी धनात्मक (+)।
- इसके विपरीत दिशा में दूरी ऋणात्मक (−)।
- वस्तु हमेशा दर्पण/लेंस के बाईं तरफ रखी मानी जाती है → u हमेशा ऋणात्मक (−)।
- अवतल दर्पण की f ऋणात्मक (−) होती है।
- उत्तल दर्पण की f धनात्मक (+) होती है।
- उत्तल लेंस की f धनात्मक (+) होती है।
- अवतल लेंस की f ऋणात्मक (−) होती है।
5. दर्पण vs लेंस — एक नजर में तुलना
| बिंदु | दर्पण (Mirror) | लेंस (Lens) |
|---|---|---|
| सिद्धांत | परावर्तन (Reflection) | अपवर्तन (Refraction) |
| सूत्र | 1/f = 1/v + 1/u | 1/f = 1/v − 1/u |
| क्षमता (Power) | P = 1/f | P = 1/f (Dioptre) |
| अवतल प्रकार | अवतल दर्पण → अभिसारी | अवतल लेंस → अपसारी |
| उत्तल प्रकार | उत्तल दर्पण → अपसारी | उत्तल लेंस → अभिसारी |
| Focal Length | f = R/2 | Lens Maker Formula से |
| Magnification | m = −v/u | m = v/u |
| पार्श्व उलटापन | होता है | नहीं होता |
6. One-Liners — बार-बार Repeat होने वाले तथ्य
ये वो One-Liners हैं जो Railway NTPC, Group D, SSC GD, SSC MTS और UP Police के पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्रों में बार-बार आए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और याद करें।
🔴 दर्पण (Mirror) One-Liners
- अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण (Converging Mirror) कहते हैं।
- उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण (Diverging Mirror) कहते हैं।
- वाहनों में Rear View Mirror के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग होता है — क्योंकि यह बड़ा क्षेत्र दिखाता है।
- डॉक्टर (ENT) कान-नाक-गले की जाँच में अवतल दर्पण उपयोग करते हैं।
- Solar Cooker (सोलर कुकर) में अवतल दर्पण का उपयोग होता है।
- Searchlight, Headlight, Torch में अवतल दर्पण का उपयोग होता है।
- समतल दर्पण में बना प्रतिबिंब पार्श्व उलटा (Laterally Inverted) होता है।
- दो समतल दर्पण 90° पर रखें → 3 प्रतिबिंब बनते हैं।
- दो समतल दर्पण 60° पर रखें → 5 प्रतिबिंब बनते हैं।
- दो समतल दर्पण 45° पर रखें → 7 प्रतिबिंब बनते हैं।
- अवतल दर्पण में जब वस्तु फोकस (F) पर हो तो प्रतिबिंब अनंत (∞) पर बनता है।
- अवतल दर्पण में जब वस्तु C पर हो तो प्रतिबिंब भी C पर और समान आकार का बनता है।
- दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u — यह सभी प्रकार के दर्पणों पर लागू होता है।
- दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = 2 × फोकस दूरी (f) → f = R/2
- Periscope में दो समतल दर्पण 45° कोण पर use होते हैं।
🔵 लेंस (Lens) One-Liners
- उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहते हैं।
- अवतल लेंस को अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहते हैं।
- निकटदृष्टि दोष (Myopia) में अवतल लेंस (Concave Lens) का प्रयोग होता है।
- दूरदृष्टि दोष (Hypermetropia) में उत्तल लेंस (Convex Lens) का प्रयोग होता है।
- Presbyopia (वृद्धावस्था दोष) में Bifocal Lens का उपयोग होता है।
- लेंस की क्षमता (Power) की इकाई डायऑप्टर (Dioptre) है।
- उत्तल लेंस की power धनात्मक (+) और अवतल लेंस की power ऋणात्मक (−) होती है।
- आवर्धक लेंस (Magnifying Glass) में उत्तल लेंस का उपयोग होता है।
- दूरदर्शी (Telescope) और सूक्ष्मदर्शी (Microscope) दोनों में उत्तल लेंस का उपयोग होता है।
- Camera में उत्तल लेंस का उपयोग होता है।
- लेंस सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u — Mirror formula से अंतर याद रखें (+/−)।
- दो लेंसों को संपर्क में रखने पर P = P₁ + P₂
- उत्तल लेंस में जब वस्तु F के भीतर हो तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है — जैसे आवर्धक लेंस।
- Astigmatism में Cylindrical Lens का उपयोग होता है।
- पानी में डूबे उत्तल लेंस की focal length बढ़ जाती है और power घट जाती है।
⚡ प्रकाश के अपवर्तन (Refraction) One-Liners
- प्रकाश निर्वात में 3 × 10⁸ m/s की चाल से चलता है।
- पानी में प्रकाश की चाल 2.25 × 10⁸ m/s होती है।
- Snell का नियम: μ₁ sin θ₁ = μ₂ sin θ₂
- हीरे (Diamond) में पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण चमक होती है।
- Optical Fiber में पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) के सिद्धांत का उपयोग होता है।
- घने माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है, तरंगदैर्ध्य भी कम होता है।
- इंद्रधनुष (Rainbow) बनने का कारण — वर्षा की बूंदों में प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन और वर्ण विक्षेपण।
- मरीचिका (Mirage) बनने का कारण — पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR)।
- तारों का टिमटिमाना — वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण।
- प्रकाश के सात रंग: VIBGYOR → Violet, Indigo, Blue, Green, Yellow, Orange, Red.
- प्रिज्म में बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक और लाल रंग का सबसे कम होता है।
- लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक → इसलिए danger signal में लाल रंग use होता है।
- मानव नेत्र में Retina (दृष्टिपटल) पर प्रतिबिंब बनता है — वास्तविक और उल्टा।
- मानव नेत्र का Near Point (निकट बिंदु) = 25 cm होता है।
- अबिंदुकता (Astigmatism) में नेत्र का cornea अनियमित आकार का होता है।
7. Practice MCQs — Previous Year Pattern
नीचे दिए गए प्रश्न Railway NTPC, Group D, SSC GD, SSC MTS और UP Police के previous year papers के pattern पर आधारित हैं। इन्हें solve करें और देखें कितना याद हुआ।
(b) उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा बनता है। इससे एक बड़ा क्षेत्र (wide field of view) दिखता है जो पीछे के traffic को देखने के लिए उपयुक्त है।
(c) अवतल लेंस (Concave Lens)
Myopia में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब Retina से पहले बन जाता है। अवतल लेंस (Diverging) किरणों को फैलाकर प्रतिबिंब को Retina पर बनाता है।
1/f = 1/v + 1/u
याद रखें: दर्पण सूत्र में जोड़ (+) है। लेंस सूत्र में घटाव (−) है: 1/f = 1/v − 1/u। यही अंतर exam में सबसे अधिक गलती कराता है।
5 प्रतिबिंब
सूत्र: n = (360°/θ) − 1 = (360/60) − 1 = 6 − 1 = 5
अन्य: 90° → 3 प्रतिबिंब | 45° → 7 प्रतिबिंब | 120° → 2 प्रतिबिंब
डायऑप्टर (Dioptre / D)
P = 1/f (जब f मीटर में हो)। उत्तल लेंस की power (+) धनात्मक और अवतल लेंस की power (−) ऋणात्मक होती है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection — TIR)
जब प्रकाश घने माध्यम से विरल माध्यम में Critical Angle से अधिक कोण पर जाता है, तो वह वापस लौट आता है। Optical Fiber में इसी का उपयोग होता है।
अवतल दर्पण (Concave Mirror)
अवतल दर्पण सूर्य की किरणों को एक बिंदु (Focus) पर केंद्रित करता है जिससे वहाँ अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। यही सोलर कुकर का सिद्धांत है।
25 cm
सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति 25 cm से कम दूरी की वस्तु स्पष्ट नहीं देख सकता। इसे Least Distance of Distinct Vision भी कहते हैं।
बैंगनी (Violet)
VIBGYOR में Violet की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है → इसलिए सबसे अधिक विचलन। Red का विचलन सबसे कम। Trick: “V(ery) short = most deviation”
अवतल दर्पण (Concave Mirror)
अवतल दर्पण प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करता है जिससे कान, नाक और गले की गहराई में प्रकाश भेजा जा सकता है। ENT doctors इसी का उपयोग करते हैं।
Last Minute Revision Trick — Mirror vs Lens याद रखने का आसान तरीका:
अवतल दर्पण + उत्तल लेंस = दोनों अभिसारी (Converging) = दोनों Focus करते हैं।
उत्तल दर्पण + अवतल लेंस = दोनों अपसारी (Diverging) = दोनों फैलाते हैं।
Mirror Formula: 1/f = 1/v + 1/u | Lens Formula: 1/f = 1/v − 1/u — बस यही अंतर है।
निष्कर्ष
इस लेख में आपने प्रकाश (Light), दर्पण (Mirror) और लेंस (Lens) के सभी जरूरी सूत्र, उपयोग, Sign Convention और One-Liners पढ़े जो Railway NTPC, Group D, SSC MTS, SSC GD और UP Police परीक्षाओं में बार-बार repeat होते हैं। दर्पण और लेंस के सूत्रों में सबसे बड़ा अंतर याद रखें — Mirror में (+) और Lens में (−) होता है। उपयोगों में: अवतल दर्पण → डॉक्टर, Headlight, Torch, Solar Cooker; उत्तल दर्पण → Rear View Mirror; उत्तल लेंस → Camera, Microscope, दूरदृष्टि; अवतल लेंस → निकटदृष्टि।
इन One-Liners को रोज एक बार revise करें — exam में पक्के 2-3 प्रश्न इसी से आएंगे। UPSarkariJob.com पर ऐसे ही Science Notes के लिए visit करते रहें।
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👉 सभी Exam Notes देखेंPrakash Paravartan tatha Apvartan: दर्पण एवं लेंस सूत्र (Full Guide)
प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light):
जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी या पॉलिशदार सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आती है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। इसके दो मुख्य नियम हैं:
- आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण (i) हमेशा परावर्तन कोण (r) के बराबर होता है (∠i = ∠r).

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light):
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मूल पथ से विचलित हो जाती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
- नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं। ‘स्नेल का नियम’ (Snell’s Law) कहता है कि sin i/sin r = constant (अपवर्तनांक).

दर्पण और लेंस सूत्र (Mirror & Lens Formula):
दर्पण सूत्र परीक्षा परीक्षाओं (SSC, Railway) में अक्सर इन सूत्रों पर आधारित सवाल पूछे जाते हैं: दर्पण सूत्र (Mirror Formula) & लेंस सूत्र (Lens Formula)

Mirror Formula Hindi Railway SSC Lens Formula SSC GD UP Police

FAQ: Prakash Mirror Lens Sutra Hindi प्रकाश दर्पण लेंस सूत्र हिंदी
Q1. रेलवे और SSC परीक्षा के लिए दर्पण सूत्र (Mirror Formula) क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: Railway Group D और SSC GD में सीधे सूत्र या उन पर आधारित छोटे न्यूमेरिकल्स पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से अवतल (Concave) और उत्तल (Convex) दर्पण के उपयोग और फोकस दूरी निकालने के प्रश्न आते हैं।
Q2. प्रकाश के परावर्तन के नियम (Laws of Reflection) दैनिक जीवन में कहाँ दिखते हैं?
उत्तर: हम अपना चेहरा समतल दर्पण में देख पाते हैं या पेरिस्कोप (Periscope) का कार्य करना पूरी तरह परावर्तन के नियमों पर आधारित है।
Q3. प्रकाश का अपवर्तन का चित्र (Diagram) परीक्षा में कैसे काम आता है?
उत्तर: अपवर्तन के चित्र से यह समझना आसान होता है कि जब प्रकाश ‘विरल से सघन’ माध्यम में जाता है, तो वह अभिलंब की ओर झुक जाता है। यह प्रश्न SSC GD Science Notes में अक्सर पूछा जाता है।
Q4. लेंस की क्षमता (Power of Lens) का मात्रक क्या है?
उत्तर: लेंस की क्षमता का मात्रक डायोप्टर (Diopter) है। इसे $P = 1/f$ (मीटर में) सूत्र से निकाला जाता है।
Q5. Class 10 Reflection and refraction of light से प्रतियोगी परीक्षाओं में क्या आता है?
उत्तर: कक्षा 10 का यह अध्याय बेस है। परीक्षाओं में अपवर्तनांक (Refractive Index), पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) और लेंस की शक्ति जैसे टॉपिक्स से वन-लाइनर्स (One Liners) बनते हैं।
Q6. अगर दर्पण को पानी में डुबो दिया जाए, तो उसकी फोकस दूरी (f) पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दर्पण की फोकस दूरी उसके माध्यम पर निर्भर नहीं करती (जबकि लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है)। यह एक प्रो-लेवल का प्रश्न है जो अक्सर बोर्ड और रेलवे भर्ती में कन्फ्यूज करने के लिए आता है।
Q7. गाड़ी के हेडलाइट में ‘अवतल दर्पण’ ही क्यों लगाया जाता है, जबकि साइड मिरर में ‘उत्तल’?
उत्तर: हेडलाइट में अवतल दर्पण प्रकाश को एक शक्तिशाली समांतर बीम (Parallel Beam) में बदल देता है, जबकि साइड मिरर (उत्तल) पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र का छोटा और सीधा प्रतिबिंब दिखाता है।
Q8. क्या बिना किसी सूत्र के हम बता सकते हैं कि प्रतिबिंब वास्तविक है या आभासी?
उत्तर: हाँ! यदि प्रतिबिंब हमेशा सीधा बन रहा है (जैसे उत्तल दर्पण में), तो वह आभासी (Virtual) होगा। यदि प्रतिबिंब उल्टा बन रहा है, तो वह हमेशा वास्तविक (Real) होगा।
एक्सपर्ट सलाह (UpSarkariJob Special)
प्रिय छात्रों, Prakash mirror lens sutra pdf download करने से ज्यादा जरूरी है कि आप साइन कन्वेंशन (Sign Convention) यानी + और - के अंतर को समझें। अवतल दर्पण के लिए f हमेशा ऋणात्मक (Negative) होता है। रेलवे साइंस नोट्स के लिए इस पेज को बुकमार्क कर लें।
निष्कर्ष: प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन न केवल कक्षा 10 बल्कि सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए भी अनिवार्य है।
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