वर्तमान समय मे Rambhadracharya Hanuman Chalisa काफी चर्चा में है। क्यूँ की हनुमान चालीसा का “शुद्ध” या “सही” संस्करण गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित मूल अवधी पाठ ही है।
Rambhadracharya Hanuman Chalisa Rambhadracharya
लेकिन प्रिंट मिस्टेक से हमे श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने से सफलता नहीं मिल पा रहा था, अब तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य महाराज जी के द्वारा श्री हनुमान चालीसा में चार त्रुटियों को बताया है, जिसमे 6वीं, 27वीं, 32वीं और 38वीं चौपाई में कुछ गलत छपा हुआ है, जिसे अब आप को ठीक कर लेना चाहिए.
जिसमें कोई विशेष बदलाव नहीं; बल्की महत्वपूर्ण ये हैं की आप की श्रद्धा, एकाग्रता और सही उच्चारण के साथ पढ़ा जाए, और यह पाठ ब्रह्म मुहूर्त में करना शुभ माना जाता है, न कि जल्दबाजी या क्रोध में, जिससे आप को हनुमान जी की कृपा प्राप्त हो और सभी कष्ट दूर हों। चलिए टेँशन न लीजिये हम है न, हम आपके लिए श्री रामभद्राचार्य संसोधित श्री हनुमान चालीसा जिसमे सभी त्रुटियों को सही करके श्री हनुमान चालीसा जिसे श्री रामभद्राचार्य चालीसा भी कहा जा रहा हे ये लेकर आये है।
Rambhadracharya Hanuman Chalisa
| || दोहा || |
| श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। |
| || चौपाई || |
| जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ |
| महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा॥ |
| हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, कांधे मूंज जनेऊ साजै॥ शंकर स्वयं केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग बन्दन॥ |
| विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥ |
| सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज संवारे॥ |
| लाय सजीवन लखन जियाये, श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ |
| सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा॥ |
| जम कुबेर दिगपाल जहां ते, कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ |
| तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ |
| प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ |
| राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डर ना॥ |
| आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै॥ |
| नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ |
| सब पर राम राय सिरताजा, तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फल पावै॥ |
| चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु-संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥ |
| अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा, सादर हो रघुपति के दासा॥ |
| तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम-जनम के दुख बिसरावै॥ अन्तकाल रघुबर पुर जाई, जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥ |
| और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ |
| जै जै जै हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ यह शत बार पाठ कर जोई, छूटहि बंदि महा सुख होई॥ |
| जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥ |
| || दोहा || |
| पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥ |
॥ इति श्री हनुमान चालीसा ॥
नोट: ऊपर दिए गए श्री रामभद्राचार्य चालीसा/ हनुमान चालीसा में जो शब्द हाईलाइट किये गए है, वह शब्द श्री रामभद्राचार्य जी द्वारा बताई गई हनुमान चालीसा में त्रुटियों वाले शब्दों को हटाकर उनके स्थान पर रामभद्राचार्य जी द्वारा बताए गए सही शब्द है। प्रसिद्ध विद्वान और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के अनुसार, तुलसीदास जी ने मूल रूप में इसे इस प्रकार लिखा था
रामभद्राचार्य हनुमान चालीसा
| Wrong | Right |
| संकर सुवन केसरीनंदन। | शंकर स्वयं केसरी नंदन। |
| सब पर राम तपस्वी राजा । | सब पर राम राय सिरताजा। |
| सदा रहो रघुपति के दासा।। | सादर हो रघुपति के दासा।। |
| जो सत बार पाठ कर कोई। | यह शत बार पाठ कर जोई। |
★ Hanuman Chalisa correction by Rambhadracharya ji maharaj pdf
| भक्ति और एकाग्रता: क्रोध या हड़बड़ी में पाठ न करें, जल्दबाजी में पाठ करने से अच्छा है, मन लगाकर और श्रद्धा से पढ़ें (जैसे 1, 3, 7, 11 बार)। |
| सही उच्चारण: “शंकर स्वयं केसरी नंदन” (न कि ‘शंकर भुवन’) जैसी चौपाइयों का सही उच्चारण महत्वपूर्ण है, क्योंकि मूल पाठ में यही है। |
| विशिष्ट नियम: लाल वस्त्र पहनना, घी या तिल के तेल का दीपक जलाना, और मुख पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना शुभ माना जाता है। |
| संक्षेप में, Rambhadracharya Hanuman Chalisa Rambhadracharya हनुमान चालीसा का मूल पाठ ही शुद्ध है; आपको उसे सही भाव और विधि से करना है ताकि हनुमान जी की कृपा और उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके। |
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